Saturday, 25 August 2012

शब्द संगिनी Kavita 42

शब्द संगिनी

वह आया है शब्दों के रथ पर सवार
शब्द संगिनी, उसकी अगवानी करो.

उसके लिए लगाओ लिखावटों के मेले
कवितायेँ व गीत-ग़ज़ल परोसो सुबह-शाम
कल्पनाओं और भावनाओं का सामंजस्य हो
बेसुरी बातों का बालिके, आज नहीं कोई काम.

कथा हो कोई भी व्यथा में पिरी हुई
कथन-उपकथन का संयोजन लाजवाब हो
जो भी हो, उच्च स्तरीय हो साध्वी
हर प्रस्तुति में रुतबा रुआब हो.

श्रेष्ठ कवि, श्रेष्ठ कलाकार, श्रेष्ठ साधक वह
ह्रदय के पन्नों पर मानिनी, लिखो उसका नाम तुम
शुष्क रूखे कागजों पर लिखी हुई निःसंग निर्मोही
रचनाएं अब कहाँ, विस्मृति के गर्त में हुई गुम.

मन की प्राचीर पर भयभीत खुदे हुए
सुनसान सदमे को चीर कर कोई तो मीत मिले
आज सूनी उम्र की उठान पर, पथरीली शान पर
प्रार्थना कर मनस्विनी, उसकी ही प्रीत मिले।

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