Friday, 14 September 2012

तुमने किया जो कुछ किया Kavita 52

तुमने किया जो कुछ किया

आग में न तपन थी
न रोशनी
राख का ढेर ऐसा
कि ढूँढने पर भी न मिले
कोई चिन्गारी.
तुमने दी हवा
कि अंगारे फिर से सुलग उठे
दहक-दहक दमक-दमक.
तुम्हारी थी मजाल
तुमने किया यह बवाल
मेरी ज़िन्दगी में आकर.
मृत्यु-रथ पर सवार थी मैं.
तुमने पुकारा मुझे
नृत्यांगना
कुछ रंगीला करें
सुरंजना
रास-लीला करें
उमंगिनी
बाहों में लहराओ
सुर-संगिनी
सुर से सुर मिलाओ
प्रियतमा
प्रेम का स्पर्श दो
सर्वोत्तमा
मधुर रस बन बरसो.
तुम्हारे दिए
नए नामों के साथ
हुआ मेरा पुनर्जन्म.
कि मेरी उम्र
बढ़ने की बजाय घटने लगी.
बिखरे हुए जीवन-तंतु
खूबसूरत चौखटे में सिमटने लगे.
कि मैं तुम्हारी हो गई
बिना किसी रस्मोरिवाज के
कि तुम मेरे हो गए
बिना तख्तोताज़ के.

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