Wednesday, 26 September 2012

सम से सम्बन्ध Kavita 60

सम से सम्बन्ध


मुझसे दुखी रहने वाले

ज़रा हंस तो दो.


देखो, कितनी ठंडी धूप खिली है

देखो, कितना मदमस्त सवेरा है.

आओ, इस गुनगुनी सुबह का स्वागत करो

प्यार को वक़्त की पाबंदियों से मुक्त करो

आओ, सूर्य की पहली किरण को प्यार करो

क्या पता फिर आए कब ऐसी सुबह.


सरसराती पवन बह रही है मंद-मंद

लिख दो इस चन्दनी सुगंध पर कोई छंद

तुम्हारे रूठने से फूल पत्थर बन गए हैं

आओ, मुस्कुराओ, पत्थरों को सहलाओ.

पिघल उठेंगी चट्टानें भी रेशमी स्पर्श से

सुर में आ जाएंगे सारे बेसुरे सिरफिरे.


नाज़-नखरों की इतिश्री हो गई

अब है सम से समझौता

सम से सम्बन्ध

किसी विषम का नाम नहीं लेना अब तुम

सीधी-सीधी बात करेंगे

मीठे-मीठे गीत रचेंगे.

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