Saturday, 22 September 2012

आओ मेरे साथ Kavita 54

आओ मेरे साथ


आओ मेरे साथ
हाथ में दो हाथ
और तबाह हो जाओ
बिना किसी उत्सव के.

यह मौसम किसी त्यौहार का नहीं
यह रिश्ता किसी व्यवहार का नहीं
समय के श्रृंगार का नहीं
वक्त की मनुहार का नहीं.

डूबने का मन है तो चलो डूबें
मरने का निश्चय किया है
तो आओ मरें
यह बरबादी का आयोजन है.

यह रास्ता किसी
सृजन की तरफ नहीं जाता.
यह अवस्था किसी
जीवन का अंदेशा नहीं
यह भावभूमि किसी
रस को जन्म नहीं देगी.

मिलन का एक अद्भुद क्षण
साँसों पर लिखी सरगम
काफी है खुद को मिटाने के लिए.

No comments:

Post a Comment