Sunday, 23 September 2012

रंग भर लूं चित्र में Kavita 56

रंग भर लूं चित्र में

अभी मुझे सजानी हैं सूनी दीवारें
अभी मुझे बुहारनी है धूल और गंदगी
अभी मुझे भरना है मृत दिलों में जोश
अभी मुझे करना है ज्ञान का संचार.

अभी मैं वापस लौट नहीं सकता
अभी बहुत काम बाकी है यहाँ.

अभी मुझे लिखना है एक नया गीत
अहम् के बलिदान का
अभी मुझे रचनी है एक नई कविता
सृष्टि के निर्माण की.

अभी तुम्हे प्रतीक्षा करनी होगी
पेड़ों पर नए फूल-पत्ते उगेंगे जरूर.

अभी करना है नए सूरज का इंतज़ार
अभी बैठना है एक नए अनशन पर
अभी आवाज़ उठानी है मुझे जोर से
अभी लगाने हैं नारे अपनी आज़ादी के.

तुम मनाना जश्न पर ठहरो ज़रा सी देर
रंग भर लूं चित्र में बेरंग जो था आज तक.

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