Sunday, 9 September 2012

लिखो समय-पृष्ठ पर Kavita 49

लिखो समय-पृष्ठ पर

उम्र लौट रही है पीछे
हो रही है छोटी
जीने को मिलेंगे अभी
और बहुत साल.

अभी लगेंगे और भी मेले
अभी मचेगा और भी शोर
रक्तिम उल्लासों का
मन के मधुमासों का।

दिन होंगे सुनहले
रातें होंगी रुपहली
बादल कहीं बरसेंगे
बिजली कहीं चमकेगी.

नहीं गाया जाएगा अब
मर मर कर मर्सिया
धुनें होंगी धन्वन्तरी
गुन गुन गुंजार सी.

निकलो और चमको
नव उम्मीद की तरह
फहराओ मस्ती में
विजयी नृप की तरह.

हाथ में पकड़ो कलम
लिखो समय-पृष्ठ पर
एक नया अध्याय
एक नई कथा तुम.

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