Friday, 28 September 2012

वर्तमान Kavita 66

वर्तमान

मैं हूँ और मेरा वर्तमान है
' कल ' पता नहीं कब गया
' कल ' पता नहीं कब आएगा
' आज ' में जी रही हूँ मैं
समय के असीम सहयोग से.

मैं हूँ और मेरा वर्तमान है
उच्छल तरंगों से भरा हुआ
सुर-ताल से सजा हुआ
प्रेम की कविताओं में रचा हुआ
मदमस्त खुशबू से महका हुआ.

मैं हूँ और मेरा वर्तमान है
सतरंगी रंगों से चित्रित
मखमली तारो से निर्मित
राग के खुमारों में विस्मृत
स्वप्न की उड़ानों में स्फुरित.

मैं हूँ और मेरा वर्तमान है
जिसे जी लेना भर काफी है
जिसे जी लेने भर से
पूर्ण हो रही है ज़िन्दगी
मैं हूँ स्तंभित, चमत्कृत.

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