Wednesday, 10 October 2012

गलतफहमी Kavita 71

गलतफहमी

आज तुम्हारा प्यार
नहीं है मेरे पास
प्यार की ग़लतफ़हमी
है अभी भी
जिसे मैं जिंदा रखना चाहती हूँ
ताउम्र.

तुम इतनी दूर चले गए हो मुझ से
जहां से तुम्हारे ठहाकों की आवाज़
अब मुझ तक नहीं पहुँचती
मैं खुद को समझाती हूँ
तुमने मुझे ज़रूर पुकारा होगा
मैं ही सुन नहीं पाई.

तुम इतनी दूर हो जहां
तुम्हारा चेहरा देख न पाऊँ मैं
सोचती हूँ
तुम मेरे बिना
ज़रूर उदास होंगे
दूरी के कारण अदृश्य हो.

तुम इतनी दूर मुझ से
कि मैं सोच रही हूँ
तुमने मुझे छोड़ा नही
मेरा दिल तोड़ा नहीं
विवश हुए तुम
दूर जाने के लिए.

अब मैं नहीं पा सकूंगी
तुम्हारी बाहों का सहारा
सोचती हूँ
मुझे ज़रुरत नहीं किसी सहारे की
अब मैं समर्थ हूँ
अपनी जगह तलाशने के लिए.

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