Thursday, 22 November 2012

शब्दों का आसरा Kavita 83

शब्दों का आसरा

तुम ऐसे देश में हो
जहां से लौटना असंभव नहीं
तो मुमकिन भी नहीं।
हो सकता है तुम कभी न लौटो।

ऐसे कभी न लौटने वाले से प्यार करना
जैसे एक संगीन जुर्म हो अपने ही साथ
यह कितनी बड़ी चुनौती है
तुम क्या जानो।

आगे तो कोई रास्ता ही नहीं है
और पीछे लौटना नामुमकिन है।
आगे देखो तो दिखता है एक बंद दरवाज़ा
पीछे मुड़ने पर खड़ी मिलती है एक दीवार।

एक सौभाग्य है
उम्मीद की एक ही किरण
कि शब्दों को मुझ तक पहुँचाने की
सुविधा है तुम्हे।

जानलेवा गुमराह करने वाले शब्द
जब तुम फेंकते हो मेरी ओर
तो एक शाश्वत अमृतव्य
सरसराने लगता है शिराओं में।

तुम जैसे एक नशा हो।
किसी भी नशे से बड़ा नशा।
कितना बड़ा भुलावा है यह।
कितना बड़ा छलावा है यह।

तुम्हारे जानलेवा शब्द
मेरे जीने का सहारा हैं
शब्द नहीं मिलेंगे तो सच
डोर टूट जाएगी जीवन की।

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