Monday, 24 December 2012

ग़ज़ल 6

ग़ज़ल 6

अब इस दिल को समझाएँ तो समझाएँ कैसे
तेरी तस्वीर से दिल और बहलाएं कैसे।

हमारे बीच दूरियां हैं कितने देशों की
तुमसे मिलने को अब आएँ भी तो आएँ कैसे।

तुम्हारे शब्द शब्द, सिर्फ शब्द, और शब्द
कहाँ रखें इन्हें हम दिल में छुपाएँ कैसे।

कहते हैं कि कम होता है बंटने से दर्द
तुम्ही कहो लेकिन गैरों को बताएँ कैसे।

तुम आओगे एक दिन ज़रूर आओगे
इसी उम्मीद में जीते हैं, मर जाएँ कैसे।

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