Wednesday, 2 January 2013

प्यार का पैगाम Kavita 87

प्यार का पैगाम
          जब तुम आए थे
         जैसे चारों तरफ फूल मुस्कुराए थे.
         पर मिलन की बेला में
         ये आंसू क्यों मेरी आँख में भर आए थे?
तुमने कहा
तुम वहाँ रहोगे
और मैं यहाँ
भागते जीवन की यही शर्त है.
ज़िन्दगी की भागदौड़ में
पिछड़ गया है प्रेम.
भौतिक तथ्यों की भीड़ में
प्रतीक्षारत है प्रेम.
         जो स्वतः मिला
         उसे लिया
         भगवान् के प्रासाद की तरह
         स्वीकार किया।
बिना समझौते का प्यार
मेरे तुम्हारे बीच.
शिकायतों का न होना
मेरे तुम्हारे बीच.
         उम्र के इस पड़ाव पर
         आओ जल्दी-जल्दी जी लें.
         समय की पाबंदी में
         प्यार का अमृत पी लें.

         अब तुम्हारे अनगिनत पत्र
         पत्रों में अनगिनत शब्द
         शब्दों में एक ही शब्द
         प्रेम.... प्रेम.... प्रेम.....
  
         तुमने कहा था
         मैं एक खूबसूरत ख्वाब हूँ
         जिसे तुम जी लेना चाहते हो.
         जागने के बाद भी
         अब तुम नींद में रहोगे.

         चलो, यहाँ से कहीं दूर चलें.
         सपना जो दिखाया है तुमने
         उसे पूरा तो करें !

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