Thursday, 31 January 2013

बालिग़ कौन?


बालिग़ कौन?

बलात्कार काण्ड (मशहूर। नहीं बदनाम) के छठे मुजरिम, जिसे नाबालिग ठह्रराया गया है, की जन्मतिथि है 4 जून, 1995 है यानि उसकी उम्र 16 दिसंबर को 17 साल, 6 महीने, 11 दिन थी। वाह वाह। बालिग़ होने से सिर्फ 5 महीने 19 दिन छोटा रह गया। काम में वहशी और उम्र में नादान। मैं तो कहती हूँ, इस लड़के को तड़पा-तड़पा के मारना चाहिए। देश के रहनुमां, क़ानून के रखवाले, यहाँ भी लड़की-लड़के के बीच यह भेदभाव? लड़कों की उम्र का ख्याल। लड़कियों की तो उम्र मायने ही नहीं रखती ना? 3 साल की बच्ची हो या 30 साल की औरत। छोटी से छोटी उम्र की लड़की और बड़ी से बड़ी उम्र की औरत का बलात्कार होता आया है। हरेक के बलात्कारी को एक जैसी सज़ा? यहाँ सज़ा के प्रावधान में लड़की की उम्र का ध्यान क्यों नहीं रखा जाता? कहाँ तक सुधारेंगे इस देश की क़ानून व्यवस्था को? इसकी जड़ें खोखली हुई पड़ी हैं। कानून की देवी की आँखों पर ही सिर्फ पट्टी नहीं बंधी, उसके कान भी बंद हैं और दिमाग भी।

जिस प्रकार बलात्कार या किसी भी जुर्म में लडकों की आयु का निर्धारण किया गया है कि 18 वर्ष से नीचे के युवक नाबालिग की श्रेणी में आते हैं, इसलिए उन्हें बालिगों की तरह सज़ा नहीं दी जाएगी। इसी प्रकार यह भी नियम बनना चाहिए कि 18 वर्ष से कम आयु की नाबालिग लड़की और बच्ची के बलात्कारी को निश्चित रूप से फांसी की सज़ा दी जानी चाहिए या उसकी सजा बड़ी आयु की स्त्री का बलात्कार करने वाले से अधिक होगी।

वैसे 18 वर्ष की उम्र में बालिग़ होने का निर्धारण, पता नहीं, किस आधार पर किया गया है? क्या सिर्फ उम्र के आधार पर? तो इसी उम्र को बालिग़ क्यों मानें? लड़के / लड़कियों के शरीर में 12-13 वर्ष की उम्र से यौवन में प्रवेश के परिवर्तन लक्षित होने शुरू हो जाते हैं। जहाँ तक मानसिक परिपक्वता की बात है तो उसका औसत क्या इसी उम्र में निकलता है? आजकल बच्चों को अधिक एक्सपोज़र मिल रहा है, अतः उनमें मानसिक परिपक्वता भी उम्र से पहले आ रही है। शारीरिक रूप से सक्षम लोग जुर्म करते हैं, इसलिए शारीरिक आयु के हिसाब से वयस्कता 12-13 वर्ष की आयु में आ जाती है। इसलिए बालिग़ होने की उम्र अधिक से अधिक 15 वर्ष होनी चाहिए। यूं भी, क़ानून में अनेक संशोधनों की आवश्यकता है। जब पूरी सभ्यता-संस्कृति परिवर्तित हो रही है तो नए क़ानून अपेक्षित हैं।

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