Wednesday, 23 January 2013

रसहीन Kavita 96

रसहीन

मैं कविता लिखती हूँ
इसीलिए व्यवहारिक नहीं हूँ।
तुम व्यवहारिक हो
इसीलिए भावुक नहीं हो।

मैं कविता लिखती हूँ
इसीलिए भावुक हूँ।
तुम गद्य लिखते हो
इसीलिए व्यवहारिक हो।

क्या तर्क हैं तुम्हारे?

जाओ, रस हीन,
अपना नीरस गद्य लिखो।
मुझे सरस कवितायेँ लिखने दो।

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