Sunday, 24 March 2013

छोटी कविता : 7

छोटी कविता : 7

मैंने तुम्हें जितना चाहा
उतना मैं खुद से नफरत करने लगी।
मैंने तुम्हें जितना पूजा
उतना मैं खुद की नज़रों में गिर गई।

कोई किसी को इतना ना चाहे
कोई किसी को इतना ना पूजे
कि दयनीय, गिरे हुए चेहरे
दीवारों पर लटके हुए नज़र आएँ।

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