Friday, 8 March 2013

रिश्ता ख़त्म नहीं होता Kavita 107

रिश्ता ख़त्म नहीं होता

रिश्ता ख़त्म होने के बाद भी ख़त्म नहीं होता।

यह सिर्फ मीठी या कड़वी
यादों में ही नहीं जिंदा रहता
बल्कि उलझाए रखता है
सवालों में, जवाबों में।
अलग होकर भी हम
एक-दूसरे से पूछते रहते हैं सवाल
ख्यालों में।

उन सवालों के जवाब आज भी नहीं मिलते
कि आखिर जो कुछ हुआ
वह क्यों, कब, कैसे हुआ?

सवालों में होती हैं शिकायतें
शिकायतें में होती है बेचैनी
बेचैनी में होती हैं आंसुओं की धारें
आंसुओं में बेआवाज़ चीखें और चिल्लाहटें।

बेचैनी टूटे हुए रिश्ते को और तोड़ती है
जीते जी ज़िन्दगी खुद को
मौत की तरफ मोड़ती है।

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