Wednesday, 3 April 2013

दिलफेंक Kavita 115

दिलफेंक

हम अपने को समझे थे बड़ा ही दिलफेंक
लेकिन वो हमसे भी बड़ा दिलफेंक निकला।

हमने यूं ही उछाला था दिल उसकी तरफ
उसने कितनी सफाई से उसे कैच किया।

उस पर इलज़ाम लगाएं या उसके बनके रहें
अब हम कैद में उसकी, करें तो करें क्या?

अजीब कशमकश में डूबता जाता है मन
फ़िज़ूल में ही यहाँ मेरे दिल का चैन गया।

खेल-खेल में हम खेल गए दिल का खेल
हमारा खेल सच में यूं खिलेगा, क्या था पता।

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