Sunday, 21 April 2013

छोटी कविता : 8

छोटी कविता : 8

मेरी उम्र का हिसाब न लगाए कोई
उसके मिलने के बाद से यूं ही घट रही है रोज़
वह उम्र मेरी कम करके चला गया।
मैं खुद फ़िक्र में हूँ
उसके आते-आते कहीं ख़त्म न हो जाऊँ।
उसे पाने की ख्वाहिश में
खुद न खो जाऊँ।

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