Tuesday, 23 April 2013

कोई होता Kavita 117

कोई होता

कोई होता
जो पास बैठ कर अपने
दिल की कहता सुनता।

कोई होता
जो जगी हुई आखों से
संग में सपने बुनता।

कोई होता
जो मौसम से बेपरवाह
सहरा में फूल चुनता।

कोई होता
जो शब्दों को दूर हटा
मौन की भाषा गुनता।

कोई होता
जो डूबे-डूबे से ये
आँखों के मोती चुनता।

कोई होता
जो खालीपन भरने को
अधरों पर हँसी बुनता।

कोई होता
जो बाहर के शोर तले
बिन बोले आहें सुनता।

कोई होता
जो मेरे पागलपन को
अपने जीवन में गुनता।

11 comments:

  1. आपने लिखा....हमने पढ़ा
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए कल 24/04/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    धन्यवाद!

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  2. क्या बात ...बहुत उम्दा ।

    परन्तु कहाँ कोई ऐसा होता है !!!

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  3. सुन्दर रचना

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  4. काश कोई होता.....
    मगर अक्सर कोई नहीं होता...यही जीवन है..

    सादर
    अनु

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  5. कई बार सबके होते हुए भी दिल अकेला होता है तब मन से यही आह निकलती है ... काश कोई होता ...

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  6. कोइ होता
    जो खालीपन भरने को
    अधरों पर हंसी बुलाता "
    बढ़िया लिखा है |
    आशा

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  7. बहुत उम्दा ।
    डैश बोर्ड पर पाता हूँ आपकी रचना, अनुशरण कर ब्लॉग को
    अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
    latest post बे-शरम दरिंदें !
    latest post सजा कैसा हो ?

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  8. Replies
    1. आप सब की बहुत आभारी हूँ।

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