Wednesday, 22 May 2013

रौद्र रस

रौद्र रस

क्रोध हमारे ह्रदय का एक अनिवार्य भाव है तथा नाट्यशास्त्र के नौ रसों में से एक रस है। कहते हैं, क्रोध सेहत के लिए हानिकारक होता है, क्रोध करने वाले की सेहत के लिए भी और जिस पर किया जाए, उसके लिए भी। बचपन में पढ़ा था कि जब गुस्सा आए तो मुंह में पानी भर लो, मुंह में पानी भरा रहने के कारण कुछ बोल नहीं पाओगे, यानि गुस्सा अभिव्यक्त नहीं कर पाओगे और गुस्सा अपने आप शांत हो जाएगा। आजकल शिक्षित लोग समझदार हैं। उन्हें मुंह में पानी रखने की ज़रुरत नहीं है। वे स्वयं को संयत रखने में समर्थ हैं। उनके भीतर गुस्सा हो भी तो वे बड़े सभ्य ढंग से पेश आते हैं और अपने इस मनोभाव को सामने वाले पर ज़ाहिर नहीं होने देते।  लेकिन समस्या यह है कि यदि किसी एक के प्रति गुस्सा लगातार दिल में जमा करके रखा जाए तो वह एक दिन बड़े विस्फोट का रूप ले सकता है। मैंने कभी कहीं पढ़ा था कि इस विस्फोट से बचने के लिए व्यक्ति को अपने गुस्से का निष्कासन इस तरह करना चाहिए .... किसी कोने में दीवार की तरफ मुंह करके हम उस अपने क्रोध के पात्र व्यक्ति का नाम लेकर उसे ढेर सारी गालियाँ निकालें, उसके नाम पर अपनी सारी घृणा का वमन हम उस दीवार पर कर दें, इस तरह किसी हद तक हमारे भीतर की गन्दगी निकल जाएगी और हमारा मन स्वच्छ, शुद्ध एवं शांत हो जाएगा। यह तरीका, आपको याद हो तो, फिल्म 'जब वी मेट' में भी दिखाया गया है, जब शाहिद कपूर करीना कपूर को उसके तथाकथित प्रेमी को गालियाँ सुना कर उसकी फोटो फाड़ कर फ़्लश करने के लिए कहता है और वह उसके बाद बड़ा सुकून महसूस करती है। मैंने स्वयं इस तरीके को आजमाया है और सफल पाया है। क्रोध की स्थिति में आप भी इस नुस्खे को आजमाएं।

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