Wednesday, 22 May 2013

हमारा होना Kavita 122

हमारा होना

अब मैं बस अपने लिए हूँ।
अब तुम बस तुम्हारे लिए हो।

तुम्हारे लिए होना ना होने जैसा था
तुम्हारे लिए थी तो अपने लिए नहीं थी
तुम्हारे लिए थी तो और किसी के लिए नहीं थी
तुम्हारे लिए होने ने मुझे सब से अलग किया
तुम्हारे लिए होने में मैं तुम्हारी भी नहीं हुई
तुम्हारे लिए होना भी कोई होना था?

तुमने तुम्हारे लिए मेरे होने को अपनाया
तुमने तुम्हारे लिए मेरे हँसने पर साथ दिया
तुमने तुम्हारे लिए मेरे रोने पर अभिमान किया
तुमने तुम्हारे लिए मैं जिन्दा हूँ, सच जाना
तुमने तुम्हारे लिए मैं मर सकती हूँ, सच माना
तुमने तुम्हारे लिए मेरे होने में लेकिन क्या पाया?

यह उसी की दुआओं का फल था जो हम मिले
यह उसी का श्राप था जो हम मिल कर भी ना मिले
यह उसी का छल था जो हमें छल गया
यह उसी का खेल था जो उसने हमसे खिलवाया
यह उसी की योजना थी जिसने बनाए-तोड़े स्वप्न
यह उसी कौन? वह ऊपर वाला जिसे किसी ने नही देखा।

अब मन बुझा-बुझा सा है
अब हँसना भी चाहूँ तो कैसे हँसूँ?
अब तुम्हारे नाम पर आँसू खुद-ब-खुद निकल आते हैं
अब तुम्हारी प्रतीक्षा में आँखें पथरा गई हैं
अब तुम्हारा होना होकर भी होना नहीं है
अब मेरा होना होकर भी क्या होना है?

1 comment:

  1. तुमने तुम्हारे लिए मेरे होने को अपनाया
    तुमने तुम्हारे लिए मेरे हँसने पर साथ दिया
    तुमने तुम्हारे लिए मेरे रोने पर अभिमान किया
    तुमने तुम्हारे लिए मैं जिन्दा हूँ, सच जाना
    तुमने तुम्हारे लिए मैं मर सकती हूँ, सच माना
    तुमने तुम्हारे लिए मेरे होने में लेकिन क्या पाया?
    बहुत अच्छा प्रस्तुति !
    तुमने तुम्हारे लिए मेरे होने को अपनाया
    तुमने तुम्हारे लिए मेरे हँसने पर साथ दिया
    तुमने तुम्हारे लिए मेरे रोने पर अभिमान किया
    तुमने तुम्हारे लिए मैं जिन्दा हूँ, सच जाना
    तुमने तुम्हारे लिए मैं मर सकती हूँ, सच माना
    तुमने तुम्हारे लिए मेरे होने में लेकिन क्या पाया?
    बहुत अच्छा प्रस्तुति !
    डैश बोर्ड पर पाता हूँ आपकी रचना, अनुशरण कर ब्लॉग को
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