Friday, 7 June 2013

फूलों पर लिखी कविता : 1 - 4

फूलों पर लिखी कविता : 1

हरे-हरे पत्तों में पीले कनेर
जैसे झाँक रहा हो उल्लास
कोई नहीं आसपास
जल्दी-जल्दी तोड़ कर
अपनी झोली में भर लूं
पूजा में काम आएँगे।


फूलों पर लिखी कविता : 2 

यह जो गुलमोहर है
आच्छादित होने की कला जानता है।
इसके नीचे खड़े हो जाओ
तो खुद इसके रंग में रँग जाने का भ्रम होता है।
सौन्दर्य की विशेषता यह
कि देखो तो देखते रह जाओ।


फूलों पर लिखी कविता : 3 

गुलाब तो बस गुलाब है
फूलों का राजा
लाल हो तो प्रतीक प्यार का
पीला दोस्तों पर न्यौछावर
खुशबू में बेमिसाल
काँटों के बावजूद आजा, आजा।


फूलों पर लिखी कविता : 4

सूरजमुखी अँधेरे के नहीं होते
क्योंकि सूरज अँधेरे में नहीं उगता।
मन उदास हो तो उदासी भूल जाता है
आँखें नम हों तो मुस्कुरा उठती हैं
रंग तो देखो कैसा चटख पीला
जैसे फूल टंके हों बागों के किनारे।

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