Thursday, 13 June 2013

ग़ज़ल 26

ग़ज़ल 26

तुमने याद दिलाया तो मुझे याद आया
मेरे दिल पर पड़ा था कभी गम का साया।

वो बीते हुए लम्हों की हवा फिर से चली
मेरे टूटते सपनों का सफ़र याद आया।

किसी कमज़ोर क्षण में मैंने तुम से जो कहा
वो मेरा सच में बावरापन मुझे याद आया।

बिन आँखों के चल रही थी मैं भूली-भटकी
कुछ पल साथ चले तुम मेरे बन के साया।

कटते नहीं थे बुझते हुए डूबते से दिन
तुमने कहीं से आके नेह दीप जलाया।

तब ज़िन्दगी के मायने उलझे हुए से थे
क्योंकि प्यार न था वो, वो थी धुंध की छाया।

1 comment:

  1. बहोत उम्दा है...वाह बहोत खूब.

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