Saturday, 8 June 2013

फूलों पर लिखी कविता : 5 - 10

फूलों पर लिखी कविता : 5

डैफोडिल जल रहे हैं
आग की लौ-सी चमक
तड़प-तड़प जाती है
सुनहरी लपटें जलाती नहीं
खुद जल कर रास्ता दिखाती हैं
मन के अंधेरों में।


फूलों पर लिखी कविता : 6

डेलिया ने मन मोह लिया
क्या गुम्फन, क्या रूप
जिसे नहीं बाँध सका कोई एक रंग
जैसे जीवन के अनेक रंग
लाल तो लाल, नीला भी
कभी उदास, कभी रंगीला भी।


फूलों पर लिखी कविता : 7

गेंदा के फूल संतरी और पीले
मंदिर हो या शादी का शामियाना
या हो दिवाली पर घर सजाना
गेंदा के रंगों में अनोखा खिंचाव
पत्ती-पत्ती में जुड़ाव
हर पूजा में इनका चढ़ाव।


फूलों पर लिखी कविता : 8

बेचारा सदाबहार हर मौसम में बहार
बारहों मास खिले
फिर भी किसी का दिल इस से न मिले
जैसे रोज़ आने वाले मेंहमान की कद्र न हो
फिर भी बेपरवाह खिले जाता है
खिलने को धर्म की तरह निभाता है।


फूलों पर लिखी कविता : 9

मोतिया के फूल वाह वाह
मोतिया की खुशबू वाह वाह
कामदेव की आराधना में
प्रेमियों की प्रेंम साधना में
उद्वीपन का काम करते हैं
प्रेमिका के बालों में लगे-लगे मरते हैं।


फूलों पर लिखी कविता : 10

चम्पा का फूल
मोटी टहनियों और मोटे पत्तों पर झूल
देता है पावनता का सन्देश
एक मखमली अहसास छूने में
बीचों बीच जैसे बिन्दी हो सुहाग की
राग से होती हुई सात्विक विराग की।

2 comments:

  1. …बहुत ही सच्ची रचना ,,,सुन्दर अभिव्यक्ति ...बधाई आपको

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  2. phoolo par likhi kavitaon me champpa ,motiya ,genda aadi anek bhav hai dhanyabaad

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