Wednesday, 19 June 2013

मैं धर्मनिरपेक्ष्य हूँ

मैं धर्मनिरपेक्ष्य हूँ

(राजनीति में रोज़ ही धर्मनिरपेक्षता के मुद्दे पर उठते विवाद से प्रेरित होकर लिखा गया.)

मैं सही मायनों में धर्मनिरपेक्ष्य हूँ। मेरे घर में काम करने वाली दोनों बाई मुस्लिम है, शबनम और गुलिस्ताँ। मेरे शोरूम में पहले एक लड़की शमा काम करती थी जो सुबह आते ही बाकायदा सिर ढक कर अगरबत्ती जला कर गणेश जी की पूजा करती थी। काम छोड़ने के बाद आज भी वह संपर्क में है। उसके बाद एक लड़के अहसन ने काम किया। आजकल जो लड़का आसिफ काम करता है, उसकी लाख बेवकूफियों के बावजूद मैं उसे नहीं निकाल पाती क्योंकि वह मुझे मेरे छोटे भाई, जो अब इस दुनिया में नहीं है, की तरह 'बेचारा' लगता है। कार साफ़ करने वाला भी मुस्लिम है, असलम। व्यक्तिगत बात कि मेरा हेयर ड्रेसर मुख़्तार है। (मैं पार्लर नहीं जाती, पार्लर को घर में बुलाती हूँ।) मेरी एक सबसे नजदीकी हिन्दू सहेली एक मुस्लिम के साथ कभी लिव-इन रिलेशनशिप में थी। उस महापुरुष की अपनी पत्नी उनके घर कई बार गुंडे भेज चुकी थी। मैं डरती थी और उन दोनों को समझाती थी कि भई, तुम दोनों के कारण कहीं हिन्दू-मुस्लिम झगडे न हो जाएं। (अब पता नहीं, वो लोग कहाँ हैं? जीवित हैं या मर गए?) अब मज़े की बात यह कि अभी फेसबुक पर मेरा एक नया मित्र बना (उसका नाम नहीं बताऊंगी) यह दावा कर रहा है कि वो मुझे मेरी रचनाओं के माध्यम से पिछले लगभग बीस वर्षों से जानता है और मेरा ज़बरदस्त फैन है, बड़ी मुश्किल से उसने मुझे फेसबुक पर ढूंढा है, और उसे डर है कि मैं फिर से कहीं खो ना जाऊँ।

हे अल्लाह ! या खुदा ! मेरे प्रभु ! मेरे भगवन ! राजनीति में मेरे लिए कोई जगह निकाल।

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