Friday, 21 June 2013

आँसू Kavita 134

आँसू

कभी-कभी शब्दों की जगह ले लेते हैं आँसू
होठों से शब्द नहीं झरते.
मौन पसर जाता है चारों ओर
चुपचाप ढलकते हैं आँसू।
आँखों का पानी खामोश बहता है
उसमें कलकल ध्वनि नहीं होती
पानी के छलकने का संगीत नहीं होता
उसकी लहरों में तारतम्य नहीं होता।
आँसुओं में एक कहानी होती है
जो खुद अपने को सुनानी होती है
जो कहानी कभी अधूरी रह गई
और आगे लिखी नहीं जाएगी।
आँसुओं में होता है एक स्वाद खारा
करुणा का जल नमकीन
वह अपने ही रिसते हुए ज़ख्मों पर गिरता है
पानी होकर भी खून की तरह दिखता है।


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