Wednesday, 5 June 2013

मन में उल्लास है Kavita 127

मन में उल्लास है

कैसा विरोधाभास है
तुम हो भी
और नहीं भी हो।

यह कैसा संत्रास है
अर्थ बंद रहेंगे
शब्दों में नहीं खुलेंगे।

अजीब सा आभास है
हवा में सनसनाहट
क़दमों की आहट।

मन में उल्लास है
इन्द्रधनुष में रंग हैं
सात से ज्यादा।

पागल अहसास है
खुशबू की लहर आई
छू कर चली गई।

जीवन में मधुमास है
फूल हों न हों
गीत हों न हों।

खनखनाता हास है
मुक्त होंगे उजाले
भय होंगे अतीत।

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