Friday, 28 June 2013

नीलम नागपाल मेदिरत्ता : You might find me

नीलम नागपाल मेदिरत्ता : You might find me

तुम मुझे ढूंढ रहे हो
पर मैं तो वहीँ हूँ
जहाँ तुम हो।

मुझे गली-कूचों में मत तलाशो
यहाँ-वहाँ मेरी प्रतीक्षा मत करो
न ही मैं रास्ता हूँ
न ही मंजिल।
मैं वह क्षण हूँ
जो तुम्हारी स्मृतियों में जिन्दा है,
मैं वह आँसू हूँ
जो मेरी याद में तुम्हारी आँखों से ढलकता है,
मैं वह मुस्कान हूँ
जो मुझे याद करके तुम्हारे होठों पर बिछलती है,
मैं वह कल्पना हूँ
जो हमेशा तुम्हारे ख्यालों में बसती है,
मैं वह आईना हूँ
जिसे देख कर तुम्हें मेरी याद आती है।
ओह हो, मैं यहीं हूँ
तुम्हारे चारों ओर
तुम्हारे भीतर।

अब मुझसे मत पूछना कि मैं कहाँ हूँ?

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