Friday, 26 July 2013

याद तहज़ीब से करे Kavita 157

याद तहज़ीब से करे

कितनी मुश्किल से मनाया
हमने इस दिल को
कि तुम्हें याद तो करे
पर तहजीब से करे.

तुमने अनदेखा किया
जब भी मुझे प्रियवर
कि दिल में मेरे जज़्बात
कुछ अजीब से मरे.

तुमने जो चित्र खींचा था
धुंधला गया है वह
कि जिसने जो करना है
अब तरतीब से करे.

अनचाहे भावों को अब
भटकना नहीं यहाँ
कि कोई नहीं मिलता
कभी नसीब से परे.

गंध का नामो-निशाँ
ढूंढे न मिलेगा कभी
कि पुष्प चाहे कितना
फिर करीब से झरे.

बिखरी पड़ी हैं मंदिरों में
ढेरों दुआएं
कि बददुआ में कोई बस
एक गरीब से डरे.

10 comments:

  1. बिखरी पड़ी हैं मंदिरों में
    ढेरों दुआएं
    कि बददुआ में कोई बस
    एक गरीब से डरे.

    लाजवाब पंक्तियाँ


    सादर

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  2. बहुत बढ़िया

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  3. कल 28/07/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद!

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  4. bikhri padi hai mandiro mai dhero duaayen ....achchi kaviata hai

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  5. बेजोड़ भावाभियक्ति....

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