Wednesday, 28 August 2013

अजीब अहसास Kavita167

अजीब अहसास

एक अजीब सा अहसास.... 
एक खुशबू आई
या एक हवा
या एक पर्दा-सा
उसने मुझे ढक लिया चारों तरफ से.
मैं उस खुशबू
उस हवा
उस पर्दे के बीच में बंधी हुई
सुरक्षित।
क्या वे तुम्हारी बाहें थीं?
खुशबू तो वही थी
हवा में चुप्पी भी वही
सुरक्षा का पर्दा भी वही
तुम्हारी बाहों का अहसास भी वही.
सुनो, मुझे यूं ही बँधा रहने दो
मुझे खुलना नहीं
किसी दूसरे अहसास में घुलना नहीं
तुम्हारा रंग काफी है
मेरी बदरंग ज़िन्दगी के लिए.

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