Tuesday, 6 August 2013

छोटी कविता : 10

छोटी कविता : 10

चलो चलें
अपने मन के अंधेरों में
बाहर से ज्यादा उजाले हैं वहां
यादों की जलती हुई लपटें हैं
सपनों की अधबुझी चिंगारियां हैं
प्रेम-शव का दाह-अंगार है
रोशनी के लिए इतना काफी है.

No comments:

Post a Comment