Monday, 26 August 2013

पुराना राग

पुराना राग

जैसे आठ महीने पहले निर्भया के सामूहिक बलात्कार के बाद हुआ था, उसी तरह नारे लग रहे हैं, मोमबत्तियां जल रही हैं, बलात्कारियों के लिए उम्रकैद, फांसी, बंधियाकरण की मांग उठ रही है, नेता अंट-शंट बयान दे रहे हैं. पर इस सब से होगा क्या? निर्भया पर तो फैसला आज तक नहीं आया.…. अभी टीवी में एक नेता को यह बयान देते हुए सुना कि लड़कियों को ठीक तरह पूरे कपडे पहन कर घर से बाहर निकलना चाहिए। वही पुराना राग. अब पूछे कोई इस अनीतिपूर्ण बयान देने वाले नेता से कि औरत को चाहे कपड़ों में गठरी की तरह लपेट दो, रहेगी तो वह औरत ही. बलात्कारी को मादा शरीर चाहिए। नेता शायद यह कहना चाहते हैं कि औरत जब पूरी तरह कपड़ों में लिपटी होगी तो बलात्कारी पुरुष उसके कपडे उतारने की ज़हमत नहीं उठाएगा, इस तरह वह बलात्कार से बच जाएगी। वाह वाह. शर्मनाक हैं ऐसे नेता और उनके बयान। हर महिला को अपने साथ पिस्टल रखने का कानूनी अधिकार मिलना चाहिए और यह अधिकार भी मिलना चाहिए कि वह अपनी हिफाज़त के लिए किसी भी पुरुष को शूट कर दे और उस पर कोई मुकदमा न चलाया जाए.

(Pulished in Jansatta, Chaupal Column, on 28.08.13)

No comments:

Post a Comment