Sunday, 1 September 2013

कुछ तो है Kavita168

कुछ तो है

कुछ तो है
कुछ तो है
जो मेरे तुम्हारे बीच में है.

जो मेरे तुम्हारे बीच में है
वह हमें अलग नहीं करता
बीच में हो कर भी
वह हमें जोड़ता है एक दूसरे से.

कुछ तो है
कुछ तो है
जो हमें खींचता है एक दूसरे की तरफ.

जो खींचता है हमें
अनदेखा तार जैसा
बार-बार दूर ले जाता है
बार-बार पास लाता है.

कुछ तो है
कुछ तो है
जो बाँधता है हमें।

बाँधता है रंग-बिरंगे धागों से
हँसी के रंग, आँसू के रंग
ख़ुशी के रंग, उदासी के रंग
कभी खिलते हुए, कभी बदरंग।

कुछ तो है
कुछ तो है
जो रोकता है हमें टूटने से.

टूटने नहीं देता
गहरा आघात भी 
एक कच्चा सा उम्मीद का दीया
जलता रहता है मन-अंधियार में.

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