Friday, 20 September 2013

तलाश जारी रहने दो Kavita 171

तलाश जारी रहने दो

दर्द को
बाहर निकलने के लिए
रास्ता दो
मन के सारे दरवाज़े
खिड़कियाँ
खोल दो.
बंद न रह जाए
कहीं कोई छिद्र
रिस रही जो पीर भीतर
बाहर बहने दो.

बागीचों की सज्जा
ऐसे ही नहीं होती
पेड़-पौधों की
क़तर-ब्यौंत ज़रूरी है.
हवा में घुलने के लिए
खुशबु मचल रही है
काँटों से बचने का
रास्ता खोज रही है.
मस्त बयारों में
खुशबु को भटकने दो.

सूरजमुखी
शाम को मुरझा जाता है
रजनीगंधा महकती है
रात के बाद भी.
सोचो तो सोचते रहो
उलझो तो उलझते रहो
ढूँढो तो ढूँढते रहो
हर प्रश्न का उत्तर नहीं होता.
फिर भी प्रयास-दर-प्रयास
तलाश जारी रहने दो.

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