Sunday, 20 October 2013

शारीरिक सुख

शारीरिक सुख

शारीरिक सुख, जिसे वासना का दर्जा दे कर धिक्कार दिया जाता है, मनुष्य के जीवन में एक अहम् रोल अदा करता है. विवाह संस्था में भी इसे फलीभूत होते देखा जा सकता है, जहाँ सुहाग रात पहले होती है, बाद में दंपत्ति धीरे-धीरे मन के मेल-मिलाप की ओर बढ़ते है.
संतानोत्पत्ति में अक्षम होने पर नियोग से संतान-प्राप्ति की कहानियाँ इतिहास एवं धर्मग्रंथों में भरी पड़ी हैं. राजा-महाराजाओं के ज़माने में नियोग से संतानोत्पत्ति की चाह व कोशिश वंश-परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए ज़रूरी समझी जाती थी. आज का पति क्या टेस्ट ट्यूब बेबी और सरोगेट मदर वाले तरीके छोड़ पत्नी को उसके ही किसी मित्र से संतान प्राप्ति की सहर्ष अनुमति दे सकता? संभव है, बहुत से लोग चोरी-छुपे यह करते हों. आपको सुरेन्द्र वर्मा का वह नाटक याद होगा, 'सूर्य की अंतिम किरण से सूर्य की पहली किरण तक', जिसमें एक राजा ने अपनी रानी के पास अपने दास को भेजा था, नियोग से संतान प्राप्त करने के लिए. उस दास के साथ रात भर रहने के बाद रानी ने सुबह वापस राजा के पास लौटने से इनकार कर दिया था. इस विषय पर एक फिल्म भी बनी थी (नाम याद नहीं), जिसमें पत्नी रानी मुखर्जी पति सलमान खान को संतान पाने हेतु स्वेच्छा से, शरीर-व्यवसाय में लगी एक औरत प्रीति ज़िंटा के पास भेजती है, ताकि प्रीति ज़िंटा उसके पति का बच्चा पैदा करे जिसे पति-पत्नी ले लें. बाद में सलमान प्रीति के साथ भावात्मक लगाव महसूस करता है.…. आज के समय में भी ऐसा हो सकता है लेकिन इसमें यह खतरा है कि स्त्री जिस पुरुष से प्रेम का सुख, शरीर का सुख प्राप्त करे, वह वापस अपने पति के पास लौटना ही न चाहे। And vice versa. उपर्युक्त कहानियों में शरीर-सुख के बाद, शरीर-सुख के कारण, मन में भावनाओं की उत्पत्ति देखी गई है. इसीलिए मैंने कहा, शारीरिक सुख, जिसे वासना का दर्जा दे कर धिक्कार दिया जाता है, मनुष्य के जीवन में एक अहम् रोल अदा करता है. विवाह संस्था में भी इसे फलीभूत होते देखा जा सकता है, जहाँ सुहाग रात पहले होती है, बाद में दंपत्ति धीरे-धीरे मन के मेल-मिलाप की ओर बढ़ते है.

1 comment:

  1. आदर्श का ढोंग करने वाले शारीरिक सुख को वासना कहकर प्रेम को बदनाम करते हैं |वास्तव में दाम्पत्त जीवन कि पहली सीडी शारीरिक सुख है ,इसके बिना दाम्पत्त जीवन टिक नहीं सकता|भावनात्मक बंधन तो इसके बाद आता है | नियोग राजाओं के लिए तो मान्य था ...सत्यवती ने व्यास को अम्बिका और अम्बालिका के पास भेजा था |पञ्च पांडव के बारे में सब जानते है | दशरथ के पुत्र यज्ञ के बाद पैदा हुए |परन्तु आम आदमियों में इस प्रथा का सामाजिक मान्यता नहीं है लेकिन आप सही कह रही है लुक छिप कर यह चला आरहा है |
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