Monday, 7 October 2013

नहीं आती है तेरी याद Kavita 176

नहीं आती है तेरी याद

सोच-सोच कर मैं परेशान थी
कि मैं क्या भूल रही हूँ
तभी याद आया कि मैं
तुझे याद करना भूल रही हूँ.

याद भी अब तेरी आती नहीं
जिससे पहले भरा रहता था
मन और मस्तिष्क का कोना-कोना
तेरी याद के बिना
अब सब खोखला हो गया है.

जीने की वजह अब भी नहीं है पास
चारों ओर अनजाने हो जाता है उदास
लगता है, थकान है यह उम्र की.

खालीपन को किसी भी काम से भरूँ
भरता नहीं है, और मरता है
सोचूँ तेरे बारे में तो भर उठती हूँ
दर्द से, अकेलेपन के अहसास से.

तू न सही, तेरी याद सही
जीने के लिए एक वजह तो थी
अब जीऊँ तो किसलिए जीऊँ?
आजा, याद आजा
मेरे जीने का कम से कम
इतना बहाना तो बन.

No comments:

Post a Comment