Tuesday, 31 December 2013

ग़ज़ल 33

ग़ज़ल 33

दिल करता है, तेरे नाम पर मर जाने को
कितने फसाद किए तूने मुझे रुलाने को.

मेरा चमन उजाड़ कर भी चैन न मिला तुझे
रोज़ भेजता है लाल फूल दिल जलाने को.

खुद अँधेरों में बैठा है तो मैं क्या करूँ
क्यों चला आता है मेरी रोशनी बुझाने को?

कितनी बदसलूकियाँ, कितनी बदतमीज़ियाँ
कितने तामझाम मेरा सब्र आज़माने को?

कौन से पल में मेरी तकदीर ने धोखा किया
याद क्यों रखूँ उसे पर क्या करूँ भुलाने को?

2 comments:

  1. मेरा चमन उजाड़ कर भी चैन न मिला तुझे
    रोज़ भेजता है लाल फूल दिल जलाने को.
    नया वर्ष २०१४ मंगलमय हो |सुख ,शांति ,स्वास्थ्यकर हो |कल्याणकारी हो |
    नई पोस्ट नया वर्ष !
    नई पोस्ट मिशन मून

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    1. आपकी आभारी हूँ. Happy New Year.

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