Wednesday, 11 December 2013

आज की प्रार्थना Kavita 181

आज की प्रार्थना

चलो, चलें एक ऐसी राह
जहाँ न हो कोई परवाह।

हम अपने में हों संतुष्ट
मन में नहीं किसी की चाह.

हँसी का हस्तक्षेप रहे
न कोई दर्द, न कोई आह.

द्वेष घृणा सब जाएँ भूल
किसी से न हो कोई डाह.

सुलझें सब उलझे हुए धागे
मस्त चैन की न कोई थाह.

बुझ जाएँ जलते अंगार
जीवन ऐसा कि वाह वाह.

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