Sunday, 5 January 2014

एक रिश्ता बेनाम सा (भगवंत अनमोल)

एक रिश्ता बेनाम सा (भगवंत अनमोल)

भगवंत अनमोल का उपन्यास 'एक रिश्ता बेनाम सा' इतना रोचक है कि एक बार पढ़ना शुरू कर दें, तो बीच में छोड़ने को मन नहीं करता, फिर भी अपनी व्यस्तता के चलते मुझे इसे किश्तों में पढ़ना पड़ा. उपन्यास की व्याख्या करते हुए लेखक ने स्वयं इसे 'सच्ची मित्रता की झलक दिखाता उपन्यास' कहा है, लेकिन वस्तुतः यह एक प्रेम कहानी ही है, आत्मिक प्रेम की कहानी, जिसमें भौतिक प्रेम की झलक उस समय नज़र आती है जब प्रेम भौतिकता का रूप लेने से पहले ही न्यौछावर हो जाता है. उपन्यास के अंत में बहुत सारी उलझनें एक साथ प्रस्तुत कर दी गई हैं, वैसे उपन्यास का अंत कुछ भी हो सकता था, इस कहानी में बहुत सारे 'अंत' होने की सम्भावनाएं थीं. लेखक ने हकलाने की समस्या का भी बहुत बारीकी से अध्ययन करके हकलाने वाले व्यक्ति की राह में आने वाली मुश्किलों का सच्चा बयान किया है और उसका सटीक उपचार सुझाया है. 

एकाध अश्लील अभिव्यक्तियाँ भी हैं जो मुझे कतई पसंद नहीं आईं जैसे 'मेरी तो फट गई'. अनेक स्थलों पर इस वाक्य का प्रयोग किया गया है जो अत्यंत घटिया लगता है. यह सस्ती मानसिकता की ओर संकेत करता है. बोलने में इस तरह के ग्राम्य प्रयोग चल जाते हैं लेकिन लिखने की भाषा बोलने कि भाषा से भिन्न होती हाई, अधिक सुसंस्कृत एवं सुगठित होती है. इस प्रकार के अर्थ को ध्वनित करने के लिए 'मैं तो मर गया' या 'मेरी तो जान निकल गई' या 'मैं तो कहीं का नहीं रहा' आदि प्रयोग किए जा सकते थे।

उपन्यास का प्रस्तुतीकरण, छपाई आदि बेहद सुन्दर है. बढ़िया कागज़, आकर्षक कवर. पूरे उपन्यास में अनेक भावोक्तियाँ हैं जो प्रवचन की शक्ल में हैं. अच्छा लगा यह देख कर कि अनमोल ने यह ज्ञान चाहे किताबों में पढ़ा हो या अन्य लोगों के अनुभव में सुना हो, उसे उन्होंने अंदर तक ग्रहण किया है, व्यर्थ नहीं जाने दिया। उन्होंने उद्घाटित भी किया है कि वे एक मोटिवेशनल पुस्तक 'कामयाबी के अनमोल रहस्य' भी लिखने वाले हैं.

अभी अनमोल की उम्र ही क्या है? वे अभी केवल 24-25 वर्ष के हैं. उनका पहला उपन्यास था 'द परफेक्ट लव'. इतनी छोटी उम्र में दो उपन्यासों की उपलब्धि कोई कम नहीं है. अनमोल में प्रतिभा है, जो उनके लेखन में स्वतः लक्षित है. मेरी शुभकामना उनके साथ है.

उपन्यास : एक रिश्ता बेनाम सा
लेखक : भगवंत अनमोल
प्रकाशक : साहित्य संचय, सोनिया विहार, दिल्ली - 110094 
प्रकाशन वर्ष : 2014
 पृष्ठ : 144
आकार : डिमाई
मूल्य : 300 रुपये

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