Thursday, 16 January 2014

छोटी कविता 18

छोटी कविता

जितने रहस्य मेंरे दिमाग में छुपे हैं
जितने विचार मेरे मन में कुलबुलाते हैं,
यदि वह सब मैं उजागर कर दूँ
तो न जाने कितने खून हो जाएँ।
और सबसे पहले तो खून मेरा ही हो.
इसलिए चुप्प।
एक चुप सौ को हराए।
एक चुप शान्ति बनाए।
एक चुप कितनी खलबलियाँ होने से बचाए।
(खुद के ख़िलाफ़ एक खतरनाक ख्याल)

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