Tuesday, 7 January 2014

'आप' को सलाह

'आप' को सलाह

आम आदमी पार्टी, आप हर बात पूछने के लिए जनता के पास न जाएँ क्योंकि जनता ने ही आपको चुन कर भेजा है, जनता जानती है कि आपमें सही निर्णय लेने की क्षमता है. आपका कॉंग्रेस के साथ गठबंधन सही है क्योंकि कॉंग्रेस स्वयं अपनी गलतियों को स्वीकार कर रही है और आपसे अच्छी बातें सीखने की बात कह रही है. ऐसा नहीं है कि गलत और बुरा आदमी कभी सही और भला नहीं हो सकता। आलोचनाओं से निरुत्साहित होने की अपेक्षा उन्हें सकारात्मक रूप में लिया जाना चाहिए। कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना।

अरविंद केजरीवाल जी, मुझे समझ नहीं आता कि आपके पाँच कमरों के मकान पर भी इतनी हाय-तौबा क्यों हुई? और आप आवश्यकतानुसार बड़े घर में रहने पर क्यों ऐतराज़ कर रहे हैं? क्या झुग्गी-झोंपड़ी के स्तर पर रह कर मुख्यमंत्रित्व निभाएंगे? मुख्यमंत्री बनने से पहले आपकी ज़रूरतें भिन्न थीं, आज बदल गई हैं. ओहदे के अनुसार ही रहन-सहन गरिमाशाली होना चाहिए। कल को आपके माता-पिता आपके साथ रहने आ गए तो उन्हें कहाँ रखेंगे? एक कमरा उनके लिए, एक आप पति-पत्नी के लिए, एक आपके अकेले के लिए चिंतन-मनन हेतु, आपके जितने बच्चे हैं (दो-तीन, मालूम नहीं), एक-एक उनके लिए, एक मेहमानों के लिए, तो यह छह-सात बेडरूम हो गए, इनके साथ ड्राइंग-डाइनिंग हाल, किचन, स्टोर रूम, हर बेडरूम के साथ अटैच्ड बाथरूम, सर्वेंट रूम, यानि इतना बड़ा घर तो आपको चाहिए ही चाहिए। यदि सब एक ही कमरे में घुस कर रहेंगे तो आपका दिमाग का बुरा हाल हो जाएगा। घर का अर्थ केवल 'सोना' और 'खाना' ही नहीं होता, बल्कि घर आपमें रचनात्मकता, सृजनात्मकता, ऊर्जा का संचार करने में भी सहायक होता है. घर का पूर्ण सुविधाजनक होना अनिवार्य है. इसलिए लोगों के कहने पर न जाएँ, अपने पद की गरिमा एवं आवश्यकता के अनुसार घर में रहें।

अरविंद केजरीवाल बहुत आस्थावादी हैं, हर बात में भगवान पर विश्वास करते हैं, अपनी पार्टी की जीत को भी भगवान का चमत्कार बताते हैं, तो वे यह भी समझें कि राखी बिरला की कार पर एक बच्चे की बॉल का गिरना (राखी बिरला द्वारा उसे आपराधिक तत्वों से जोड़ना बहुत स्वाभाविक था) भगवान की ओर से दिया गया संकेत है कि आप पर कभी भी विपदा आ सकती है, इसलिए आप को सुरक्षा लेने से इंकार नहीं करना चाहिए। जिस समय आपने यह ऐलान किया कि आप पुलिस की सुरक्षा नहीं लेंगे, उस समय आप आम आदमी थे जिसे किसी से कोई डर नहीं होता। अब सरकार में आते ही आप ख़ास बन चुके हैं जिससे ईर्ष्या करने वाले बहुत लोग हैं, अन्य पार्टियाँ आप से जल रही हैं, ऐसे में आप को कोई भी नुक्सान पहुंचा सकता है. आपको सुरक्षा के घेरे में रहना/चलना चाहिए। जब तक आप सत्ता में नहीं थे, तब तक आपके बुलंद हौसले आप को आदर्शवादी होने की सलाह दे रहे थे लेकिन सता में आने के बाद आप को व्यवहारिक दृष्टि से इन बातों पर गौर करना है. सब जानते हैं कि आप इन बाहरी चीज़ों पर न गर्व करेंगे, न इनकी लालसा रखेंगे। सुरक्षा, बड़ा मकान, सरकारी गाड़ी, ये सब ऐश्वर्य का प्रतीक नहीं है बल्कि आपकी पोस्ट (पद) की डिमांड (माँग) है, जिसकी ज़रुरत का अहसास आप को पद पर आने से पहले नहीं पता था.

5 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन जले पर नमक - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. आपकी बात से सहमत हूँ !
    नई पोस्ट सर्दी का मौसम!
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  4. sahi hai hamare desh me democracy aapko faisle lene hetu adhikrit kar chuki hoti hai

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