Wednesday, 15 January 2014

सर्व धर्म हिताय Kavita 182

सर्व धर्म हिताय

वह मंदिर भी जाता है और मस्जिद भी
गुरुद्वारे भी जाता है और चर्च भी
परेशान आदमी का कोई मज़हब नहीं होता
दुखी आदमी हर धर्म को मानता है.
पता नहीं कौन सा पंडित-ग्यानी
कौन सा मुल्ला-मौलवी
कौन से वाहेगुरु-सतगुरु
कौन से फादर
कब रहम की बारिश कर दें.
पता नहीं कौन सी पूजा-हवन
कौन सा ताबीज
कौन सी कार-सेवा
कौन सी मोमबत्ती
जीवन के बुझे हुए दीये को रोशन कर दे.

2 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन मौसम है शायराना - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. आपकी आभारी हूँ.

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