Sunday, 6 April 2014

रिश्ते की खूबी Kavita 189

रिश्ते की खूबी

रिश्ते में खूबसूरती हो
बस छुपी हुई बदसूरती हो..

कि भीतर सब ख़त्म हो
बाहर निभने की रस्म हो.

कि अंदर ठंडी साँसें हों
बाहर ढकी फाँसें हों.

कि अंदर चकनाचूर हो
बाहर बादस्तूर हो.

कि अंदर चीख-चिल्लाहट हो
बाहर खिलखिलाहट हो.

कि अंदर सूना जंगल हो
बाहर मंगल ही मंगल हो.

कि अंदर पानी छलछल हो
बाहर पानी में कलकल हो.

कि अंदर बुझी अंगारी हों
बाहर दहकती चिंगारी हों.

कि अंदर हाय-हाय हो
बाहर सुखद-सुखाय हो.

कि अंदर भाव-क्रान्ति हो
बाहर पवित्र शान्ति हो.

यह भी रिश्ते की खूबी है
जो नाव किनारे डूबी है.

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