Tuesday, 1 July 2014

इत्मीनान है Kavita 200

इत्मीनान है

मुझे न कोई भय है, न संदेह.
मैं हर भय से मुक्त हूँ
मैं हर संदेह से परे हूँ
हल्की होकर उड़ रही हूँ.

मुझे न कोई अपेक्षा है, न प्रतीक्षा.
मुझमें किसी मोह का वास नहीं
मैं उम्मीदों से ऊपर हूँ
मैं स्वयं में सुरक्षित हूँ.

मुझमें न कोई बेसब्री है, न अधैर्य
सब कुछ छूट गया है
खालीपन भरा-भरा है
ग़रीबी में बादशाहत है.

मुझमें न कोई आस है, न त्रास
न मैं बदहवास हूँ
दुःख हो गए हैं नियंत्रित
बस, अपने बस में हूँ.

अब मुझमें स्वप्न जन्म नहीं लेते
आकांक्षाओं के पुष्प नहीं पनपते
उदासियों की शान है
इत्मीनान ही इत्मीनान है.

No comments:

Post a Comment