Friday, 4 July 2014

जन्मों के मित्र Kavita 201

जन्मों के मित्र

पुरानी याद के खज़ानों में
अब बेहिचक धुँधले से चित्र होते हैं.

जहाँ निःशब्द परेशानी है
अजीबोग़रीब बहके चरित्र होते हैं.

दुखों की बात भी क्या खूब है
कई बिन बुलाए सदमे विचित्र होते हैं.

बार-बार सामने आते हैं
जो जन्म-जन्म-जन्मों के मित्र होते हैं.

मिलन के श्राप से पगलाए हुए
एक दूसरे को छू कर पवित्र होते हैं.

No comments:

Post a Comment