Thursday, 24 July 2014

कमाल है Kavita 204

कमाल है

वह आया और सब तहस-नहस कर गया
कमाल है
फिर भी उसने मुझे आँधी और तूफ़ान कहा.

क्या बात उसके धौंस और धमाकों की
कमाल है
हक़ ऐसा कि जैसे सब उसकी जायदाद रहा.

तेवर ऐसे ज्यों क़त्ल कर देगा अभी 
कमाल है
बातों में उसकी किरचें शब्दों में खून बहा.

सोचा था उसके आने से आएगी बहार
कमाल है
हवा का झोंका भी आया जैसे बदबू में नहा,

किताबों में पढ़ी थीं ईमान की बातें
कमाल है
सिर्फ वफादार दिखने को मैंने इतना सहा.

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