Monday, 21 July 2014

मन की आँखें खोल Kavita 203

मन की आँखें खोल

मन की आँखें खोल बबुआ, मन की आँखें खोल.

बहुमूल्य अर्थ खो गए
मृत्यु है अनमोल बबुआ।

पल में 'हाँ' और पल में 'ना' है
बातों में है झोल बबुआ।

मेरा सब तेरा हो जाए
वाणी ऐसी बोल बबुआ।

इस जग परउपदेश घनेरे
निज कर्मों को तोल बबुआ।

सहज सरल सीधी चालें चल
झंझट मत ले मोल बबुआ।

मुड़-मुड़ कर वापस जाना है
यह दुनिया है गोल बबुआ।

पावन है रिश्तों की माया
कहीं ज़हर मत घोल बबुआ।

मुक्ति पर्व में आँसू कैसे
ढम ढम बाजे ढोल बबुआ।

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