Sunday, 21 September 2014

दो एकांत Kavita 206

दो एकांत

तुमने एक दिव्य पुरुष से प्रेम किया
तुम्हारे छूने से उसकी दिव्यता द्विगुणित हुई
तुम तृप्त हुईं
वह धन्य हुआ.
स्पर्श प्रेम को अलौकिक बनाता है
देवत्व पर पहुँचाता है
यह तुमसे ज़्यादा उसने जाना.
उसने अपने एकांत आध्यात्म को
तुम्हारे प्रेम से भरा
तुम्हारा एकांत उसके एकान्त में मिल कर
परमानन्द हुआ.
वह प्रेम के ज्ञान से शून्य सर्वज्ञ ज्ञानी
तुम साक्षात प्रेमिका
एक दूसरे से मिल कर पूर्ण हुए
दो एकांत आपस में मिल कर
मेले और त्यौहार में परिवर्तित हुए.

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