Monday, 22 September 2014

मैं जी लूँ Kavita 208

मैं जी लूँ

मेरे हिस्से की हवा
मेरे हिस्से की धूप
मेरे हिस्से का गगन
मेरे हिस्से की धरा
मुझे दे दो
बाकी सब तुम ले लो।
मेरे हिस्से के दर्द
मेरे हिस्से के दुःख
मेरे हिस्से की शर्म
मेरे हिस्से के भ्रम
मैं जी लूँ
अपने सुख तुम जी लो।
मेरे हिस्से की दुविधा
मेरे हिस्से के द्वंद्व
मेरे हिस्से की लाचारी
मेरे हिस्से के प्रश्न
मैं हल कर लूँ
अपने तुम हल कर लो।
मैं अपना जीवन जी लूँ
तुम अपना जीवन जी लो।

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