Monday, 13 October 2014

छोटी सी चिंगारी

छोटी सी चिंगारी 

मुझसे फेसबुक पर बहुत लोग निकटता महसूस करते हैं और अपनी समस्याएँ डिस्कस करते हैं. अपनी कितनी गुप्त बातें भी बता देते हैं. मेरी रचनाओं से, मेरी पोस्ट से लोगों को लगता है कि मैं प्रेम के मसले सुलझाने में पारंगत हूँ. (यह बात उन्हें नहीं पता कि मैं अपने ही मसले नहीं सुलझा पाती।) एक मित्र से जब मैंने पूछा कि आपने मुझ अनजान पर कैसे भरोसा किया तो उन्होंने कहा, "आपकी रचनाओं से, आपके चेहरे से, आपकी मुस्कराहट से, आपकी आँखों से मुझे यह विश्वास हुआ कि मैं अपना यह रहस्य आपने साथ बाँट सकता हूँ." तो कई बार ऐसा होता है कि दूर बैठे भी किसी के साथ हमारी हृदयतन्त्री मिल जाती है और हम अपना दुःख-सुख बाँट लेते हैं.

कुछ समय पूर्व एक 28 वर्षीय पुरुष ने मुझे लिखा, "यदि आपने मेरी समस्या का समाधान नहीं किया तो मैं आत्महत्या कर लूँगा।" मैंने समस्या बताने के लिए कहा. पूरा दिन मैसेज करके उन्होंने बताया कि वे अविवाहित हैं और अपने से सात वर्ष बड़ी एक विवाहित महिला से उनका प्रेम सम्बन्ध है, तथा शारीरिक सम्बन्ध भी है. उस महिला के तीन या चार? बड़े बच्चे हैं. वह महिला भी उनसे उतना ही प्रेम करती है, उसके पति का व्यवहार उसके साथ ठीक नहीं है. मैंने कहा, "जब आप दोनों ही एक-दूसरे से इतना प्रेम करते हैं तो समस्या कहाँ है? यूँ ही चलाते रहिए।" वे बोले, "नहीं, अब मुझसे यह बर्दाश्त नहीं होता कि वह एक गैर मर्द के साथ रहे."

"गैर मर्द? मैं समझी नहीं।" मैंने पूछा।

"उसका पति. न जाने रात में वह उसके साथ क्या करता होगा। सोच कर ही मेरा खून खौल उठता है। मेरे लिए अब यह बात बर्दाश्त के बाहर होती जा रही है कि वह प्यार मुझसे करती है और रहती किसी और के साथ है. मैं मर जाऊँगा, मणिका जी, आप कुछ कीजिए।"

मैं कहना चाहती थी कि गैर मर्द तो आप हैं, लेकिन उस समय यह कहना उन मित्र का दिल तोडना होता। मैंने पूछा, "आप मुझसे क्या सहयोग चाहते हैं?"

"आप मुझे बताएँ कि मैं उसके आदमी को रास्ते से कैसे हटाऊँ? मैं उसके बिना ज़िंदा नहीं रह सकता। मैं ज़हर खा लूँगा।" प्यार वाकई जुनूनी होता है.

"क्या आप उस औरत से शादी कर सकते हैं?" मैंने पूछा।

"ज़रूर कर सकता हूँ, करना चाहता हूँ पर कैसे करूँ?"

"क्या आप उसके बच्चों को, जो आपसे दस-बारह साल छोटे हैं, अपने बच्चों की तरह अडॉप्ट करेंगे? उनके पिता बनेंगे?" मैंने पूछा।

"हाँ, ज़रूर बनूँगा, लेकिन बच्चे शायद माँ के साथ आना पसंद न करें क्योंकि वे अपने पिता से ज़्यादा प्यार करते हैं." यहाँ मुझे लगा कि बच्चों के लिए उनके मन में पूर्ण स्वीकार नहीं है.

"फिर भी, आप अपनी बताएँ कि बच्चों को अपनाने में आपको कोई ऐतराज़ तो नहीं?" मैंने फिर पूछा।

"नहीं, मुझे कोई ऐतराज़ नहीं।"

"आपके घरवालो को ....… "

"मुझे किसी की कोई परवाह नहीं।"

"तो ऐसा कीजिए, उन महिला से कहिए कि आप उनसे शादी करना चाहते हैं, वे अपने पति से तलाक लेने की तैयारी करें।" मैंने उन्हें सुझाव दिया।

"मैं अभी उनसे यह पूछता हूँ, और आपसे रात को फिर बात करता हूँ." उन्होंने कहा. मैंने सोचा, फोन पर पूछ रहे होंगे या उनसे मिलने चले गए होंगे।

रात को उनका मैसेज आया, "मणिका जी, वे अपने पति से तलाक लेने के लिए तैयार नहीं हैं. मैंने बहुत कहा, उनके आगे रोया, गिड़गिड़ाया कि मैं उनके बिना जी नहीं सकता लेकिन वे नहीं मानीं। कहने लगीं, इतने बड़े बच्चे हैं, ये सब बातें शोभा नहीं देतीं, उनका पति जैसा भी है, वह उसी के साथ गुज़ारा कर लेंगी।"

"अब आप सोचिए कि आपको क्या करना है? यूँ ही अधर में लटके रहना है या move on करना है? यह सोच कर अपने दिल को समझाइए कि आपने प्यार तो सच्चा किया लेकिन पात्र सही नहीं चुना।" मैंने पूछा।

"पता नहीं, मैं मर जाना चाहता हूँ. एकदम से उसे नहीं छोड़ पाऊँगा।"

"एक झटके से तोड़ दीजिए, कष्ट एक ही बार होगा। रोज़ थोड़ा-थोड़ा तोड़ेंगे तो कष्ट रोज़ होगा।" मैंने कहा और मैसेज बॉक्स बंद कर के सो गई.

सुबह उठी तो आधी रात को आया हुआ उन मित्र का मैसेज देखा, लिखा था, "आपसे बात करके बहुत तसल्ली मिली। मैं रोज़ उसके साथ भागने के ख्वाब देखता था, सोचता था, जब कहूँगा, वह मेरे साथ भाग चलेगी, सब कुछ छोड़-छाड़ कर. उसे तलाक दिलवा कर शादी करने की बात कभी सोची ही नहीं थी. आपने सुझाया तो अच्छा हुआ, उसका जवाब पता चल गया. अब अपने को समेटूँगा। फिलहाल, बड़ा हल्का महसूस कर रहा हूँ. आपका शुक्रिया।"

मुझे हैरानी हुई, लो, यह तो जैसे कोई समस्या ही नहीं थी, इतना चटपट इसका समाधान भी निकल आया. कई बार एक छोटी सी चिंगारी ही रोशनी दे जाती है. लेकिन यह भी मानना पड़ेगा दोस्तों कि लड़के भी पागलपन की हद तक प्यार करते हैं.

(Words 813 / Pages 3)

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