Friday, 17 October 2014

प्यार अनजान Kavita 214

प्यार अनजान

प्यार को क्या पता था
तुम गोरे हो या काले
छोटे हो या बड़े
अच्छे हो या बुरे?
प्यार को तो बस होना था
जो मुझसे पूछे बिना
तुमसे हो गया.

प्यार को क्या पता था
किससे होना है
कैसे होना है
क्यों होना है?
प्यार को तो बस होना होता है
जो अनजाने में
तुमसे हो गया.

प्यार को क्या पता था
आगे क्या होगा
होगा तो कैसे होगा
होगा भी या नहीं होगा?
प्यार को तो बस होना था
तुम्हारे सम्मोहन में
बिन कोशिश के हो गया.

प्यार को क्या पता था
रास्ते की धुंध का
मौसमों की मार का
टूटते ऐतबार का?
प्यार को तो बस होना था
बिना किसी योजना के
गलत जगह हो गया.

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